घर गिराने की जल्दी क्यों थी...' सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छलका पीड़ितों का दर्द, अतीक अहमद की जमीन बता चलाया था बुलडोजर

 

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साल 2021 में, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में 5 लोगों को सरकारी नोटिस मिला. अगले ही दिन उनके घर गिरा दिए गए. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में इस मामले की सुनवाई चली. पिछले दिनों कोर्ट ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने इस तरह घर गिराए जाने को 'गैर-कानूनी और अमानवीय' कहा. उन्होंने ‘प्रयागराज डेवलमेंट ऑथोरिटी’ को आदेश दिया कि सभी पीड़ितों को छह सप्ताह के भीतर दस-दस लाख रुपये दिए जाएं


घर गिराने की इतनी जल्दी क्यों थी?"

2021 में अपना घर खोने के बाद से लेकर अब तक याचिकाकर्ताओं ने अपना जीवन कैसे गुजारा? अब उनकी कहानी सामने आई है. 46 साल के विजय कुमार सिंह, बेनीगंज इलाके में एक मेडिकल स्टोर चलाते हैं. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि नया घर खरीदे नौ महीने ही हुए थे कि उसे गिरा दिया गया. इसके बाद से सिंह किराए के घर में रह रहे हैं. वहां वो अपनी पत्नी वंदना और अपने दो छोटे बच्चों के साथ रहते हैं. उनके किराए के घर से वो प्लॉट 800 मीटर दूर है, जहां कभी उनका घर होता था

उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य सरकार को घर गिराने की इतनी जल्दी क्यों थी. 6 मार्च, 2021 को इस मामले में नोटिस दिया गया था. नोटिस मिलने के बाद पीड़ित कोर्ट पहुंचे थे. सिंह बताते हैं कि कोर्ट का आदेश आने से पहले ही 7 मार्च, 2021 को घर ध्वस्त कर दिए गए. सामान हटाने के लिए बस दो घंटे का समय दिया गया.



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